Monday, 20 March 2017

भारतीय किसान

भारत एक कृषि प्रधान देश है। 70% भारतीय लोग किसान हैं। वे भारत देश के रीढ़ क़ी हड़ॾी क़े समान है। खाद्य फसलों और तिलहन का उत्पादन करते हैं। वे वाणिज्यिक फसलों का उत्पादक़ है। वे हमारे उद्योगों के लिए कुछ कच्चे माल का उत्पादन क़रते इसलिए वे हमारे राष्ट्र के जीवन रक्त है। भारत अपने लोगों की लगभग 60 % कृषि पर प्रत्यक्ष या पपरोक्ष रूप से निर्भर करता है। मानसून की विफलता सूखापन, बेहतर कीमतों की कमी और भारत भर में किसानों द्वारा की गई आत्महत्याओं की एक श्रृंखला के लिए नेतृत्व किया है, जो सभी के बिचौलियों द्वारा किसानों के शोषण की एक श्रृंखला को जन्म दे सकता है। भारतीय किसान पूरे दिन और रात क़ाम क़ऱते है। वह सूर्य और बरसात में काम करते है। वह बीज बोते है और रात में फसलों पर नजर रखते भी है। वह आवारा मवेशियों के खिलाफ फसलों की रखवाली क़ऱते। चोरों के खिलाफ फसल की रखवाली क़ऱते, फसलों क़ो काट क़ऱ, उन्हें घर में सभालक़ऱ ऱख़ते। गाय भारतीय किसानो की माता क़े समान होती। वह अपने बैलों का ख्याल रखते है। आजकल, कई राज्यों में बैलों की मदद से खेती करने कि संख्या लगभग खत्म हो गई हैं और ट्रैक्टर की मदद् से खेती कि जाती है। उनक़ी पत्नीय़ॉ और बच्चों उनके काम में उनकी मदद कऱते है।

किसानों की हालतसंपादित करें

भारतीय किसान गरीब है। उनकी गरीबी पूरी दुनिया के लिए प्रसिद्ध है। किसान को दो वक़त का खाना भी नसीभ नही हो पाता। उऩहे मोटे कपड़े का एक टुकड़ा नसीभ हो पाता है। वह अपने बच्चों को शिक्षा नहीं दे पाते। वह अपने बेटे और बेटियों का ठीक पोशाक नहीं कऱ पाते। वह अपनी पत्नी को गहने पहऩऩे का सुख नही दे पाते। किसान की पत्नी कपड़े के कुछ टुकड़े के साथ प्रबंधित करने के लिए है। वह भी घर पर और क्षेत्र में काम करती है। वह गौशाला साफ कऱती, गाय के गोबर बनाकऱ दिवारो पर चिपकाती और उन्हें धूप में सूखाती। वह गीले मानसून के महीनों के दौरान ईंधन के रूप में उपयोग होता। भारतीय किसान को गांव के दलालों द्वारा परेशान किया जाता है। वह साहूकार और कर संग्राहकों से परेशान रहते इसलिए वह अपने ही उपज का आनंद नहीं कर पाते हैं। भारतीय किसान के पास उपयुक्त निवास करने के लिए घर नही होता। वह भूसे फूस की झोपड़ी में रहते है। उसका कमरा बहुत छोटा है और डार होता। जबकी बड़े किसानों का बहुत सुधार हुआ है, छोटे भूमि धारकों और सीमांत किसानों की हालत अब भी संतोषजनक से भी कम है।
पुराने किसानों की अधिकांश अनपढ़ आदि ज्यादा पढी-लिखी नही थी लेकिन नई पीढ़ी के अधिकतर किसान शिक्षित हैं। उनके शिक्षित होने के नाते उन्हें बहुत मदद मिलती है। वे प्रयोगशाला में अपने खेतों की मिट्टी का परीक्षण करवा लेते है। इस प्रकार, वे समझ जाते की उनके क्षेत्रों मे सबसे ज्यादा फसल किसकी होगी। भारतीय किसान सरल संभव तरीके से सामाजिक समारोह मनाता है। वह हर साल त्योहार धूम से मनाते है। वह अपने बेटे और बेटियों की शादी का जश्न भी धूम से मनाते। वह अपने परिजनों और दोस्तों और पड़ोसियों के मनोरंजन भी करने मे कसर नही छोडते। वह अपने संबंधों के यहॉ यात्रा पर अक्सर जाया करते।

जीवन सुधारने के उपायसंपादित करें

किसानों की मॉग मुफ्त बिजली और पानी नहीं है, बल्कि बिजली की निर्बाध आपूर्ति के लिए हैं जिसके लिये वे भुगतान करने के लिए तैयार है। पंजाब जैसे राज्यों में, पहली बार में हरित क्रांति से किसानों को बहुत मदद मिली लेकिन कम कीमतों मैं बम्पर फसलों की उपज के कारण उनके काम मैं बधाओ ने आना शुरु कर दिया। भारतीय किसानों की हालत में सुधार किया जाना चाहिए। उन्हे खेती की आधुनिक विधि सिखाया जाना चाहिए। उन्हे साक्षर बनाया जाना चाहिए। उनको पढा लिखा बनाना चाहिए। वह हर संभव तरीके में सरकार द्वारा सहायता प्रदान की जानी चाहिए। छोटे किसानों ने भी कुछ कुटीर उद्योग शुरू करने का निर्णय ले लिया। फसल चक्र प्रणाली और अनुबंध फसल प्रणाली कुछ राज्यों में शुरू कर दिया गया। इस तरह के कदम किसानो को सही दिशा में ले जाते और लंबे समय तक किसानी करने मे मदद करते। भारत का कल्याण किसानो पर ही निर्भर करता है।

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